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हर जिले में 10 मास्टर ट्रेनर तैयार करने की योजना, आपदा प्रशिक्षण के लिए बनेगा वार्षिक कैलेंडर

यूएसडीएमए और एनआईडीएम की रूपरेखा में खोज-बचाव, मॉक ड्रिल और व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल; अभी यह क्षमता-विकास योजना है, पूर्ण क्रियान्वयन का दावा नहीं।

दिनांक: 20 सितंबर 2026

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उत्तराखंड में विद्यार्थियों के साथ आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण करती टीम; यह स्वतंत्र प्रतिनिधि तस्वीर है।सांकेतिक तस्वीर
प्रतिनिधि तस्वीर: Apsinghkvofd / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)। · फोटो का स्रोत · लाइसेंस

उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में आपदा प्रबंधन की स्थानीय क्षमता बढ़ाने के लिए प्रत्येक जिले में पहले चरण में 10 मास्टर ट्रेनर तैयार करने की योजना बनाई गई है। 20 सितंबर को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के बीच हुई चर्चा में वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर विकसित करने पर सहमति का उल्लेख किया गया। प्रस्तावित कार्यक्रम अधिकारियों और कार्मिकों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी, खोज-बचाव, आपात प्रतिक्रिया और मॉक ड्रिल का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर केंद्रित है।

मास्टर ट्रेनर मॉडल का उद्देश्य प्रशिक्षित लोगों का छोटा राज्यस्तरीय समूह बनाना भर नहीं, बल्कि जिलों में नियमित प्रशिक्षण आगे पहुंचाने की क्षमता बनाना है। पहाड़ी जिलों में भूस्खलन, अचानक बाढ़, सड़क बंद होने और दूरसंचार बाधित होने के जोखिम मैदानी जिलों से अलग हो सकते हैं; इसलिए एक समान पाठ्यक्रम के साथ स्थानीय खतरे, उपलब्ध संसाधन और निकासी मार्ग भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनने चाहिए। महिला, बुजुर्ग, बच्चे, दिव्यांग व्यक्ति, पर्यटक और दूरस्थ गांव अलग सहायता आवश्यकताएं रखते हैं, जिन्हें अभ्यासों में शामिल करना जरूरी है।

यह घोषणा प्रशिक्षण ढांचे की योजना बताती है; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी जिलों में 10 प्रशिक्षक तैयार हो चुके हैं। आगे वास्तविक प्रगति को चयनित प्रशिक्षकों की संख्या, प्रशिक्षण पूरा करने वालों, जिला-स्तरीय अभ्यासों, स्वतंत्र मूल्यांकन और सीखी गई कमियों पर सार्वजनिक रिपोर्ट से मापा जाना चाहिए। पंचायत, स्कूल, अस्पताल और स्थानीय स्वयंसेवकों तक प्रशिक्षण पहुंचना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। साथ लगी फोटो एक पुराने स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम की Creative Commons प्रतिनिधि छवि है, 20 सितंबर की बैठक की तस्वीर नहीं।

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