केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण घटाने पर काम कर रहे स्टार्टअप और नवाचार कंपनियों से संवाद किया। बैठक का लक्ष्य ऐसी तकनीक पहचानना था जो सस्ती हो, बड़े स्तर पर लग सके और स्रोत पर मापने योग्य परिणाम दे।
चर्चा में ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी को छेड़छाड़-रोधी बनाना, औद्योगिक उल्लंघन पहचानने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डीजल जनरेटर की वास्तविक समय निगरानी, निर्माण स्थलों की धूल, यांत्रिक सड़क सफाई, गड्ढा मरम्मत और मॉड्यूलर धूल नियंत्रण जैसे प्रस्ताव शामिल रहे।
तकनीक अकेले प्रदूषण खत्म नहीं कर सकती। उसकी स्वतंत्र जांच, सार्वजनिक डेटा, रखरखाव लागत और एजेंसियों की जवाबदेही भी जरूरी होगी। पायलट परियोजनाओं के परिणाम स्पष्ट मापदंड पर प्रकाशित होने चाहिए ताकि प्रभावी समाधान ही व्यापक स्तर पर अपनाए जाएं।
यह रिपोर्ट 17 अक्टूबर 2026 की दिनांकित आधिकारिक विज्ञप्ति के तथ्यों पर स्वतंत्र हिंदी संपादन के साथ तैयार की गई है। मूल दस्तावेज का लिंक पारदर्शिता के लिए दिया गया है। इसमें किसी नामित पत्रकार, संपादक या समीक्षक की भूमिका का दावा नहीं किया गया है।