गांधीधाम। दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड की ई-मेथनॉल परियोजना की आधारशिला 26 सितंबर को रखी गई। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार यह बंदरगाह-आधारित सुविधा जहाजों के लिए हरित ईंधन बनाने और आपूर्ति करने की दिशा में विकसित की जा रही है।
परियोजना के पहले चरण में लगभग 1,200 करोड़ रुपये निवेश और प्रतिदिन 100 टन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य बताया गया है। दूसरे चरण में 1,100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश से इतनी ही क्षमता और जोड़ने की योजना है। दोनों चरण पूरे होने पर कुल निवेश 2,300 करोड़ रुपये होगा। दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण और असम पेट्रो-केमिकल्स का पूंजी योगदान अनुपात 76:24 बताया गया है।
सरकारी विज्ञप्ति में 3,500 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर तथा 750 अमेरिकी डॉलर प्रति टन की संभावित उत्पादन लागत का अनुमान है। ये परियोजना-पूर्व दावे हैं, सत्यापित परिचालन परिणाम नहीं। वास्तविक लागत नवीकरणीय बिजली, हरित हाइड्रोजन, पानी, वित्त और उत्पादन क्षमता के उपयोग पर निर्भर करेगी। रोजगार संख्या भी निर्माण और संचालन के अलग चरणों में बदल सकती है।
ई-मेथनॉल का जलवायु लाभ तभी मजबूत होगा जब इस्तेमाल होने वाला हाइड्रोजन और बिजली वास्तव में कम-कार्बन स्रोतों से आए और पूरी आपूर्ति श्रृंखला का उत्सर्जन लेखा उपलब्ध हो। यह लेख आधिकारिक घोषणा का स्वतंत्र हिंदी सार है। परियोजना पूरी होने, परीक्षण, वाणिज्यिक उत्पादन और जहाज कंपनियों के खरीद समझौतों की अलग-अलग पुष्टि आगे आवश्यक होगी।