भारत और ब्राजील के व्यापार निगरानी तंत्र की आठवीं बैठक 31 अगस्त को ब्रासीलिया में हुई। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और ब्राजील की विदेश व्यापार सचिव तातियाना लैसर्दा प्राजेरेस ने इसकी सह-अध्यक्षता की। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार बैठक का केंद्र द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और बाजार पहुंच से जुड़ी व्यावहारिक बाधाओं को कम करना था। दोनों पक्षों ने 2025-26 के द्विपक्षीय व्यापार को 15.07 अरब अमेरिकी डॉलर बताते हुए 2030 तक इसे 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह लक्ष्य है, हासिल हो चुका व्यापार स्तर नहीं।
चर्चा में फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, इंजीनियरिंग सामान और मशीनरी को प्राथमिक क्षेत्रों के रूप में रखा गया। फरवरी 2026 में भारत के सीडीएससीओ और ब्राजील के एएनवीआईएसए के बीच हुए समझौते को दवा नियमन में सहयोग का आधार बताया गया। कृषि उत्पादों के पौध-स्वास्थ्य अनुरोध, सीमा प्रक्रियाएं और इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता भी एजेंडे में रही। इन व्यवस्थाओं के प्रभाव का आकलन वास्तविक नियामक मंजूरियों और व्यापार प्रवाह के बाद किया जा सकेगा।
भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार की संदर्भ शर्तों पर प्रगति की समीक्षा भी हुई। आधिकारिक विवरण के अनुसार 2025 में भारत-मर्कोसुर व्यापार 20.84 अरब डॉलर रहा। बैठक के साथ आयोजित व्यापारिक कार्यक्रम में 25 से अधिक भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए और महत्वपूर्ण खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि कारोबार, डिजिटल सेवाएं तथा उन्नत विनिर्माण संभावित सहयोग क्षेत्र बताए गए। दोनों देशों ने ब्रिक्स, जी20 और विश्व व्यापार संगठन में समन्वय बनाए रखने की बात भी कही।