मूल आधिकारिक विज्ञप्ति पर आधारित स्रोत-संपादित समाचार। तारीख और कथन उसी विज्ञप्ति के संदर्भ में पढ़ें।
डिजिटल व्यापार और स्थिरता से जुड़े उपायों के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियम बदल रहे हैं। इसी संदर्भ में व्यापार एवं निवेश विधि केंद्र की नौवीं वर्षगांठ पर कानूनी विश्लेषण मजबूत करने की जरूरत सामने रखी गई। वाणिज्य मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को कार्यक्रम का विवरण जारी किया; आयोजन 7 अक्टूबर को नई दिल्ली में हुआ था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने वीडियो संबोधन में कहा कि स्थापित नियमों पर उठते सवाल और नए विषय वैश्विक व्यापार एजेंडा बदल रहे हैं। उन्होंने मुक्त व्यापार समझौतों की वार्ता तथा विवाद निपटान में संस्थान की सहायता का उल्लेख किया। यह चर्चा व्यापार नीति की कानूनी तैयारी पर केंद्रित थी, किसी नए समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा पर नहीं।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने निवेश संरक्षण और राज्यों की नियामक स्वतंत्रता के बीच संतुलन का मुद्दा उठाया। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून में संस्थागत ढांचे और सार्वजनिक शक्ति से जुड़े प्रश्न महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। संस्थान के प्रतिनिधियों ने वार्ताओं और कानूनी राय देने में अपने काम का विवरण भी रखा।
कार्यक्रम में व्यापार और सतत विकास पर वर्षगांठ पत्रिका तथा निवेश कानून संबंधी समाचार पत्र का विशेष अंक जारी हुआ। महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टरों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान का उल्लेख किया गया। इससे नीति-निर्माण में विशेषज्ञता की जरूरत रेखांकित हुई, लेकिन किसी नए बाध्यकारी नियम के लागू होने की सूचना नहीं दी गई।