उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों के जोखिम का आकलन करने के लिए आठ सितंबर 2026 को विशेषज्ञ दल रवाना किया गया था। प्राधिकरण की नौ सितंबर की सूचना के अनुसार, अभियान चमोली के सरस्वती ताल और उत्तरकाशी के केदारताल पर केंद्रित है।
दल को झीलों की मौजूदा स्थिति, जलस्तर, खतरे के संभावित कारकों और नीचे के क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करना था। प्राधिकरण ने इसे बैथीमेट्री सर्वेक्षण बताया है, जिसमें झील की गहराई से जुड़ा अध्ययन शामिल होता है।
उस समय जारी सूचना में राज्य की 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में बताया गया और चार का सर्वेक्षण पूरा होने की जानकारी दी गई। शेष झीलों का अध्ययन चरणबद्ध होना था।
यह रिपोर्ट अभियान शुरू होने की आधिकारिक सूचना का सार है। इससे सर्वेक्षण पूरा होने, किसी नए खतरे की पुष्टि या वर्तमान निकासी चेतावनी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। यात्रा और सुरक्षा संबंधी निर्णय के लिए संबंधित जिला प्रशासन के ताजा निर्देश देखें।