वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की उच्चस्तरीय टीम ने पंजाब के फिरोजपुर और फरीदकोट जिलों में धान की पराली प्रबंधन की जमीनी तैयारी की समीक्षा की। संयुक्त बैठक में दोनों जिलों के उपायुक्त और संबंधित विभाग शामिल हुए।
टीम ने इन-सिटू और एक्स-सिटू उपयोग, फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की उपलब्धता, हॉटस्पॉट निगरानी, प्रवर्तन और किसानों तक मशीन पहुंच की स्थिति देखी। ड्रोन तथा कम लागत वाले सेंसर से निगरानी और रुझान विश्लेषण पर भी चर्चा हुई।
आयोग ने किसानों, एग्रीगेटर और उद्योग के बीच समन्वय बढ़ाने को कहा। पराली जलाने की रोकथाम केवल दंड से नहीं होगी; मशीन समय पर मिले, भूसे की खरीद और भंडारण व्यवस्था बने तथा किसान को व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध हो—ये सभी कड़ियां साथ चलनी होंगी।
यह रिपोर्ट 17 अक्टूबर 2026 की दिनांकित आधिकारिक विज्ञप्ति के तथ्यों पर स्वतंत्र हिंदी संपादन के साथ तैयार की गई है। मूल दस्तावेज का लिंक पारदर्शिता के लिए दिया गया है। इसमें किसी नामित पत्रकार, संपादक या समीक्षक की भूमिका का दावा नहीं किया गया है।