वित्त मंत्रालय ने आईडीबीआई में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी से जुड़े वर्ष 2003 के विधायी घटनाक्रम पर प्रकाशित रिपोर्टों के बाद स्पष्टीकरण जारी किया। मंत्रालय के अनुसार संसद में हिस्सेदारी घटाने को सीमित करने वाला संशोधन प्रस्तुत हुआ था, लेकिन वह स्वीकार नहीं हुआ और अधिनियमित कानून का हिस्सा नहीं बना।
स्पष्टीकरण में 17 दिसंबर 2018 के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का उल्लेख किया गया। न्यायालय ने कहा था कि संसदीय बहस के दौरान दिए गए वक्तव्य कानून का स्थान नहीं ले सकते और आईडीबीआई निरसन अधिनियम, 2003 में सरकार को हिस्सेदारी घटाने से रोकने वाला प्रावधान नहीं है।
यह सरकारी पक्ष का औपचारिक स्पष्टीकरण है; किसी प्रस्तावित लेनदेन की शर्तें, समय और नियामक प्रक्रिया अलग आधिकारिक दस्तावेजों से तय होंगी। निवेशकों को अपुष्ट खबरों के बजाय वैधानिक खुलासों पर भरोसा करना चाहिए।
यह रिपोर्ट 17 अक्टूबर 2026 की दिनांकित आधिकारिक विज्ञप्ति के तथ्यों पर स्वतंत्र हिंदी संपादन के साथ तैयार की गई है। मूल दस्तावेज का लिंक पारदर्शिता के लिए दिया गया है। इसमें किसी नामित पत्रकार, संपादक या समीक्षक की भूमिका का दावा नहीं किया गया है।