मूल आधिकारिक विज्ञप्ति पर आधारित स्रोत-संपादित समाचार। तारीख और कथन उसी विज्ञप्ति के संदर्भ में पढ़ें।
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (एएसडब्ल्यू) में से एक 'अमिनी' को 5 नवंबर, 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है।
एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी (पूर्व में जीआरएसई) को जीआरएसई कोलकाता द्वारा इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) के वर्गीकरण नियमों के अनुसार डिजाइन और निर्मित किया गया है।
ये पोत भारतीय नौसेना के सबसे बड़े जलज्वारीय युद्धपोतों में से एक हैं, जो अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और सोनार से लैस हैं, जिससे पानी के नीचे के खतरों का प्रभावी ढंग से पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम है। ये पोत नौसेना की पनडुब्बी रोधी, तटीय निगरानी और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को और मजबूत करेंगे।
अमिनी का नाम लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के अमिनी द्वीप से लिया गया है। यह पोत पूर्ववर्ती पेट्या तृतीय श्रेणी के पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस अमिनी की अगली पीढ़ी है, जिसे 2002 में सेवामुक्त कर दिया गया था, इस प्रकार यह विशिष्ट विरासत नामों को बनाए रखने की नौसैनिक परंपरा को जारी रखता है।
अमिनी की डिलीवरी भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सरकार के आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप है। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से निर्मित यह पोत घरेलू रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम की बढ़ती मजबूती और आयात पर निर्भरता में कमी का प्रमाण है।