उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए छह राज्यों ने 15 सितंबर को समझौते पर हस्ताक्षर किए। आधिकारिक विवरण के अनुसार उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली इस व्यवस्था के पक्षकार हैं। बैठक में संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ केंद्रीय गृह और जल शक्ति मंत्रालय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। यह समझौता परियोजना की सहमति और वित्तीय व्यवस्था से जुड़ा कदम है; इसे बांध का निर्माण पूरा होने या लाभ मिलने की शुरुआत नहीं माना जाना चाहिए।
प्रस्तावित परियोजना टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध और 1,562 मिलियन घन मीटर जल भंडारण की परिकल्पना करती है। सरकारी वक्तव्य में 97 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत का अनुमान दिया गया है। ये परियोजना-स्तर के अनुमान हैं, इसलिए अंतिम लाभ निर्माण, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, लागत, पुनर्वास और संचालन व्यवस्था पर निर्भर रहेगा।
केंद्र ने इसे राष्ट्रीय परियोजना बताते हुए लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार उठाने और शेष 10 प्रतिशत भागीदार राज्यों द्वारा वहन किए जाने की बात कही है। उत्तराखंड की वित्तीय चिंताओं को केंद्रीय योजनाओं में समाहित करने का आश्वासन भी दर्ज है। समझौते में यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह और दिल्ली सहित मैदानी राज्यों की जल जरूरतों का संदर्भ दिया गया, लेकिन सार्वजनिक मूल्यांकन में हिमालयी पारिस्थितिकी, विस्थापन और स्थानीय समुदायों पर प्रभाव की विस्तृत जानकारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।