बेंगलुरु। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2030-31 तक देश का रेशम उत्पादन 60 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य दोहराया है। वस्त्र मंत्रालय की 20 सितंबर की विज्ञप्ति के अनुसार केंद्रीय रेशम बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में बताया गया कि उत्पादन 2014 के लगभग 26 हजार टन से बढ़कर 42 हजार टन हुआ है। ये मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े हैं।
कार्यक्रम में शहतूत की उत्पादकता बढ़ाने, रेशमकीट पालन के चक्र सुधारने, उच्च उपज वाले संकर और आधुनिक मशीनें किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने गुणवत्ता जांच और उत्पादन क्षमता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जीआईएस और मशीन लर्निंग के उपयोग की योजना भी बताई। तकनीक का उल्लेख उसके खेत-स्तरीय लाभ, लागत या सुलभता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
रेशम उत्पादन मूल्य शृंखला में किसान, कोकून बाजार, रीलिंग, कताई, बुनाई और परिधान इकाइयां शामिल हैं। इसलिए केवल कुल उत्पादन बढ़ना किसान की शुद्ध आय बढ़ने की गारंटी नहीं देता। कीमत, रोग नियंत्रण, श्रम लागत, पानी, बीमा, बाजार तक पहुंच और गुणवत्ता-आधारित भुगतान जैसे संकेतकों को भी देखना होगा। मंत्री ने वार्षिक किसान आय 10 से 12 लाख रुपये तक ले जाने की आकांक्षा रखी, जिसे लक्ष्य के रूप में ही पढ़ा जाना चाहिए।
कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के साथ समझौता ज्ञापन, 28 वैज्ञानिकों को नियुक्ति पत्र और प्रकाशनों का विमोचन भी हुआ। यह लेख दिनांकित सरकारी विज्ञप्ति का स्वतंत्र हिंदी सार है। तस्वीर उसी कार्यक्रम की आधिकारिक छवि है। भविष्य की प्रगति का आकलन वास्तविक उत्पादन, आयात निर्भरता, निर्यात गुणवत्ता और छोटे उत्पादकों की सत्यापित आय से होना चाहिए।