मूल आधिकारिक विज्ञप्ति पर आधारित स्रोत-संपादित समाचार। तारीख और कथन उसी विज्ञप्ति के संदर्भ में पढ़ें।
भारतीय शोधकर्ताओं ने जिंक–एयर बैटरी में इस्तेमाल के लिए ऐसा धातु-रहित उत्प्रेरक विकसित किया है, जो महंगे प्लैटिनम पर निर्भरता कम करने की दिशा में उपयोगी हो सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने 7 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। अध्ययन में कोलकाता का एसएन बोस राष्ट्रीय बुनियादी विज्ञान केंद्र, मोहाली का नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान और अमरावती का एसआरएम विश्वविद्यालय शामिल हैं।
टीटीटी-डीएचटीडी नाम का यह छिद्रयुक्त कार्बनिक पदार्थ बैटरी के वायु-इलेक्ट्रोड पर ऑक्सीजन अपचयन अभिक्रिया में मदद करता है। सरल शब्दों में, उत्प्रेरक उस रासायनिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाता है जिस पर बिजली पैदा करने की क्षमता निर्भर करती है। जिंक–एयर बैटरी हवा से ऑक्सीजन लेती है, लेकिन उसकी रिचार्ज क्षमता और चक्र जीवन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
विभाग के अनुसार, प्रयोगशाला परीक्षणों में नए पदार्थ ने व्यावसायिक प्लैटिनम उत्प्रेरक के प्रदर्शन का करीब 96 प्रतिशत हासिल किया और 120 घंटे के लगातार संचालन में स्थिरता दिखाई। यह तुलना बताए गए परीक्षणों की है; इसे तैयार बैटरी की कुल दक्षता, जीवनकाल या बाजार में कीमत का प्रमाण नहीं समझना चाहिए।
शोध साइंस एडवांसेज पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। टीम ने कंप्यूटर सिमुलेशन से पदार्थ की आणविक संरचना और ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया को समझने की कोशिश की। परिणाम किफायती ऊर्जा भंडारण की संभावना दिखाते हैं, लेकिन विज्ञप्ति किसी व्यावसायिक उत्पाद के लॉन्च या तय लागत की घोषणा नहीं करती। साथ दिया गया दृश्य स्रोत में एआई-निर्मित व्याख्यात्मक चित्र के रूप में श्रेयांकित है, प्रयोगशाला की फोटो नहीं।