नई दिल्ली। डिजिटल डिजाइन से परत-दर-परत वस्तु बनाने वाली एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीक में भारत स्वदेशी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। प्रेस सूचना ब्यूरो की 7 अक्टूबर 2026 की पृष्ठभूमि रिपोर्ट के अनुसार 2022 में शुरू राष्ट्रीय एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग रणनीति के तहत 1.54 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण और 56 स्टार्टअप को समर्थन दिया गया। रणनीति अब एनएसएएम 2.0 चरण की ओर बढ़ रही है।
एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग को आम तौर पर 3डी प्रिंटिंग कहा जाता है, लेकिन औद्योगिक उपयोग में इसमें डिजाइन सॉफ्टवेयर, सामग्री विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स और गुणवत्ता नियंत्रण का गहरा मेल होता है। रिपोर्ट ने वैश्विक एएम मशीन बाजार के 2035 तक 149 अरब डॉलर और एएम-इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति शृंखला के 18 अरब डॉलर से बढ़कर 112 अरब डॉलर होने का अनुमान उद्धृत किया है। ये भविष्य के बाजार अनुमान हैं, सुनिश्चित परिणाम नहीं।
भारत में इसके उपयोग के उदाहरण अंतरिक्ष रॉकेट इंजन, रक्षा निर्माण, रोगी की शारीरिक जरूरत के अनुरूप चिकित्सा प्रत्यारोपण और प्रिंटेड इलेक्ट्रॉनिक घटकों में बताए गए हैं। अग्निकुल कॉसमॉस के एकल-टुकड़ा मुद्रित अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन तथा सेना के 3डी-प्रिंटेड आवास को सरकारी रिपोर्ट ने प्रमुख उदाहरणों में रखा। चिकित्सा उपयोगों में सुरक्षा, नैदानिक परीक्षण और नियामकीय मंजूरी अनिवार्य बनी रहती है।
यह 7 अक्टूबर की आधिकारिक पृष्ठभूमि सामग्री का स्वतंत्र हिंदी सार है। प्रशिक्षण, स्टार्टअप और बाजार संबंधी आंकड़े स्रोत के अनुसार प्रस्तुत हैं; तकनीक की व्यावसायिक सफलता लागत, सामग्री मानक, कुशल मानव संसाधन और उद्योग द्वारा अपनाने की गति पर निर्भर करेगी।