मूल आधिकारिक विज्ञप्ति पर आधारित स्रोत-संपादित समाचार। तारीख और कथन उसी विज्ञप्ति के संदर्भ में पढ़ें।
भारत और स्विट्जरलैंड ने विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार में सहयोग को अधिक दीर्घकालिक तथा संस्थागत बनाने पर चर्चा की है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन की 6 अक्टूबर को नई दिल्ली में बैठक हुई। भारतीय पक्ष की आधिकारिक विज्ञप्ति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और महासागर अनुसंधान को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में रखा गया है।
विज्ञप्ति के अनुसार, पार्मेलिन ने इस साझेदारी के लिए स्विट्जरलैंड की ओर से अतिरिक्त 4.5 करोड़ स्विस फ्रैंक निर्धारित किए जाने की बात कही। उन्होंने भारत से भी इसी प्रकार की प्रतिबद्धता की अपेक्षा जताई। यह स्विस पक्ष के बताए प्रावधान की सूचना है; इसे भारत की समान राशि की मंजूरी या पूरी रकम खर्च हो जाने की पुष्टि नहीं समझा जाना चाहिए।
बैठक में भारत–स्विट्जरलैंड अनुसंधान ढांचे और संयुक्त वैज्ञानिक बोर्ड की दिशा में हुई प्रगति पर भी बात हुई। जितेंद्र सिंह ने स्विस राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन तथा भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच आशय पत्र और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज से संबंधित कार्यान्वयन समझौते का स्वागत किया। इन पहलों का उद्देश्य संस्थानों के बीच जुड़ाव और संयुक्त अनुसंधान को मजबूत करना है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की चर्चा में विकासशील देशों तक इसके लाभ पहुंचाने का विषय भी शामिल रहा। पार्मेलिन ने भारत को आगामी जिनेवा एआई शिखर सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण दिया। उपलब्ध सूचना निमंत्रण का उल्लेख करती है, भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अंतिम कार्यक्रम की घोषणा नहीं करती।
दोनों देशों का वैज्ञानिक सहयोग 2003 के अंतर-सरकारी समझौते के बाद विकसित हुआ है। अब साझेदारी को अलग-अलग परियोजनाओं से आगे बढ़ाकर ज्ञान के आदान-प्रदान और लंबे समय तक संस्थागत सहयोग से जोड़ने की बात हो रही है। बैठक में नियमित संपर्क और अनुवर्ती कार्रवाई की जरूरत पर भी जोर दिया गया; नए शोध कार्यक्रमों के वास्तविक परिणाम उनके क्रियान्वयन के बाद सामने आएंगे।