मूल आधिकारिक विज्ञप्ति पर आधारित स्रोत-संपादित समाचार। तारीख और कथन उसी विज्ञप्ति के संदर्भ में पढ़ें।
आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में रविवार को ग्रामीण आवास योजना और नई निर्माण तकनीक से जुड़ी घोषणाएं की गईं। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बुर्रीपालेम में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण 2.0 के तहत राज्य के लिए तीन लाख आवासों की स्वीकृति की जानकारी दी। 4 अक्टूबर की आधिकारिक विज्ञप्ति में इनके लिए 3,600 करोड़ रुपये की लागत का उल्लेख है।
इसी कार्यक्रम में 177 आवासों वाली 3D कंक्रीट प्रिंटिंग पायलट परियोजना की आधारशिला रखी गई। विज्ञप्ति के अनुसार, इसकी लागत 14 करोड़ रुपये है और इसे बुर्रीपालेम तथा ओबुलनायडुपालेम में शुरू किया जा रहा है। तीन लाख आवासों की व्यापक योजना और यह सीमित पायलट परियोजना अलग-अलग पैमाने की पहल हैं; सभी तीन लाख मकान 3D प्रिंटिंग से बनाए जाने की घोषणा नहीं की गई है।
चौहान ने पायलट परियोजना के मकान छह महीने में तैयार होने की बात कही। उन्होंने इस तकनीक से समय, श्रम और लागत बचने का दावा भी किया। ये निर्माण शुरू होने के अवसर पर बताए गए लक्ष्य और अपेक्षाएं हैं, तैयार मकानों के स्वतंत्र परीक्षण या पूरी हो चुकी परियोजना के नतीजे नहीं।
अतिरिक्त आवासों के सवाल पर मंत्री ने कहा कि पहले तीन लाख मकानों का काम पूरा होने के बाद अगले तीन लाख और फिर तीन लाख आवास स्वीकृत किए जाएंगे। इसलिए कुल नौ लाख मकानों को एक साथ स्वीकृत या निर्मित मानना सही नहीं होगा। आगे के छह लाख आवासों के संबंध में कार्यक्रम में भविष्य का आश्वासन दिया गया है।
ग्रामीण परिवारों के लिए इस घोषणा का अगला महत्वपूर्ण चरण स्वीकृति को वास्तविक निर्माण में बदलना होगा। उपलब्ध विज्ञप्ति कार्यक्रम, घोषित संख्या और पायलट परियोजना का विवरण देती है; इसमें सभी लाभार्थियों की सूची, जिलेवार आवंटन अथवा प्रत्येक मकान के पूर्ण होने की तारीख नहीं दी गई है। फिलहाल खबर आवासों की स्वीकृति और परियोजना के शिलान्यास की है, तीन लाख तैयार घरों के हस्तांतरण की नहीं।