मूल आधिकारिक विज्ञप्ति पर आधारित स्रोत-संपादित समाचार। तारीख और कथन उसी विज्ञप्ति के संदर्भ में पढ़ें।
राजस्थान के जैसलमेर में अत्यंत संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, यानी गोडावण, के संरक्षण कार्यक्रम ने रविवार को नया चरण शुरू किया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 4 अक्टूबर को डेजर्ट नेशनल पार्क के सम क्षेत्र में दो नर पक्षियों को वन्य क्षेत्र में छोड़ा। पर्यावरण मंत्रालय की आधिकारिक सूचना के अनुसार, यह संरक्षण प्रजनन से पक्षियों को प्राकृतिक परिवेश में वापस लाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
मंत्रालय का कहना है कि इस प्रक्रिया से मिलने वाले अनुभव का इस्तेमाल आगे पक्षियों को छोड़ने के तरीकों और प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने में किया जाएगा। दो पक्षियों को छोड़ना अपने आप में पूरी प्रजाति की स्थिति सुधर जाने का प्रमाण नहीं है; कार्यक्रम में प्रजनन के साथ उनके प्राकृतिक आवास का प्रबंधन और खतरों को कम करना भी शामिल है।
आधिकारिक विवरण के मुताबिक, सम और रामदेवरा के संरक्षण केंद्रों में कुल 97 पक्षी हैं। इनमें 40 जंगली अंडों से और 57 संरक्षण केंद्रों में प्रजनन से प्राप्त हुए हैं। कार्यक्रम में 86 पक्षियों को प्रजनन तथा 11 को वन्य क्षेत्र में छोड़ने के लिए रखा गया है। आज छोड़े गए दो नर इसी 11 पक्षियों वाले समूह का हिस्सा हैं।
यह प्रयास पर्यावरण मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान मिलकर चला रहे हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय हुबारा संरक्षण कोष का तकनीकी सहयोग और राष्ट्रीय कैम्पा का वित्तीय समर्थन शामिल है। मंत्रालय ने समुदायों की भागीदारी तथा घासस्थलों की बहाली को भी संरक्षण रणनीति में रखा है।
डेजर्ट नेशनल पार्क के भीतर करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बाड़बंद घासस्थल संरक्षण क्षेत्रों का उल्लेख भी विज्ञप्ति में है। आगे की चुनौती प्रजनन केंद्रों में मिली उपलब्धियों को सुरक्षित प्राकृतिक आवास से जोड़ने की है। आज की सूचना पक्षियों को छोड़े जाने की पुष्टि करती है, लेकिन उनके दीर्घकालीन अस्तित्व या प्रजनन के परिणाम अभी सामने नहीं आए हैं।